आर्टिफ़िशियल स्ट्रीमिंग, जिसे स्ट्रीमिंग फ़्रॉड या "बॉटिंग" के नाम से भी जाना जाता है, तब होती है, जब अपने स्ट्रीम काउंट को बढ़ाने के लिए कोई आर्टिस्ट या तो फ़र्ज़ी तौर-तरीकों का सहारा लेता है, या फिर उसका म्यूज़िक इस तरह के हथकंडों में शामिल होता है।
अगर आपकी रिलीज़ की ज़्यादातर स्ट्रीम आर्टिफ़िशियल पाई जाती हैं, तो मुमकिन है कि आपके म्यूज़िक को स्ट्रीमिंग सर्विसेज़ से हटा दिया जाएगा, और आर्टिफ़िशियल स्ट्रीम्स से कमाई गई रॉयल्टी की पेमेंट नहीं की जाएगी। आपको DistroKid की ओर से चेतावनी भी मिल सकती है और/या आपका DistroKid अकाउंट बंद भी किया जा सकता है।
ये एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है और इसे जितनी बार दोहराया जाए उतना कम है:
- ज़्यादा स्ट्रीम्स दिलाने के वादे करने वाली किसी भी सर्विस के लिए पैसे न दें
- ज़्यादा फ़ॉलोअर्स दिलाने के झूठे वादे करने वाली किसी भी सर्विस के लिए पैसे न दें
- प्लेलिस्ट में आपको जगह दिलाने के झूठे वादे करने वाली किसी भी सर्विस के लिए पैसे न दें
और स्ट्रीम्स के लिए पैसे देना
ज़रूरी नहीं कि एक आर्टिस्ट के तौर पर ग्रो करने के लिए आप जिन सर्विसेज़ के लिए साइन-अप कर रहे हैं, उनकी वेबसाइट पर ये साफ़-साफ़ लिखा हो कि वो फ़्रॉड हैं। अब उदाहरण के तौर पर "प्रोमो" कंपनियों को ही ले लीजिए, जो ऐड बनाने के नाम पर आपको ठग लेती हैं। दस में से नौ बार ऐसी प्रोमो कंपनियाँ फ़र्ज़ी ही निकलती हैं।
कभी-कभी स्ट्रीमिंग फ़्रॉड इसलिए नहीं होता कि आर्टिस्ट के इरादे गलत थे, बल्कि इसलिए कि वो कोई संदिग्ध मार्केटिंग कैंपेनखरीद बैठा। अपने म्यूज़िक के लिए अगर आप प्रमोशनल कैंपेन चलाने के बारे में सोच रहे हैं, तो अपना होमवर्क करके सिर्फ़ नामी कंपनियों के साथ ही काम करें। मार्केट में ऐसी कई तथाकथित "प्रमोशनल" या "मार्केटिंग" कंपनियाँ हैं, जो बाहर से तो वैध लगती हैं लेकिन स्ट्रीम्स में आर्टिफ़िशियल बढ़ोतरी लाने के लिए दरअसल बॉट्स या फिर तरह-तरह के हथकंडों का इस्तेमाल करती हैं। ज़्यादातर मामलों में ऐसी कंपनियों के साथ जुड़े आर्टिस्टों का अंजाम अच्छा नहीं होता है।
आर्टिफ़िशियल स्ट्रीमिंग वाली प्लेलिस्ट
आपके म्यूज़िक को कौन-कौन सी प्लेलिस्टों में जोड़ा जा रहा है, इस बात का ध्यान रखना भी बहुत ज़रूरी होता है, फिर भले ही उन प्लेलिस्टों में प्लेसमेंट के लिए आपने कोई पैसे न दिए हों। दुर्भाग्य से, स्ट्रीमिंग फ़्रॉड करके अपनी प्लेलिस्ट को बढ़ाने वाले प्लेलिस्ट ओनर्स की भी मार्केट में कोई कमी नहीं है। अगर आपका म्यूज़िक ऐसी ही किसी प्लेलिस्ट में आ गया है, तो उसकी आर्टिफ़िशियल स्ट्रीमिंग हो सकती है, जिसके चलते आपकी रिलीज़ को हटाया भी जा सकता है।
आपको जिन-जिन प्लेलिस्ट में शामिल किया गया है, उन्हें चेक करने के स्टेप्स के लिए हमारे FAQ आर्टिकल को पढ़ें यहाँ।
किसी प्लेलिस्ट को बॉट्स से चलाया जा रहा है या नहीं, ये चेक करने के लिए ये एक बढ़िया टूल है: https://www.artist.tools/bot-checker
Spotify पर अगर आप किसी संदिग्ध प्लेलिस्ट को रिपोर्ट करना चाहते हैं, तो कृपया इस लिंक पर जाएँ: https://artists.spotify.com/c/playlist-reporter।
आर्टिफ़िशियल स्ट्रीम्स से प्लेटफ़ॉर्म कैसे निपट रहे हैं
अपने प्लेटफ़ॉर्मों पर स्ट्रीमिंग फ़्रॉड की पहचान करके उसकी रोकथाम करने की दिशा में हमारे स्ट्रीमिंग पार्टनर्स लगातार काम कर रहे हैं। ध्यान दें कि स्ट्रीमिंग सर्विसेज़ हेरफेर किए गए कंटेंट को अपने प्लेटफ़ॉर्म से हटाने का अधिकार सुरक्षित रखती हैं। इस स्टेटमेंट को सीधे Spotify पर देखें:
आर्टिफ़िशियल स्ट्रीम वो स्ट्रीम होती है, जिसे सुनने का यूज़र का कोई इरादा ही नहीं होता। इसमें ऑटोमेटेड प्रोसेस (बॉट्स या स्क्रिप्ट्स) के ज़रिए Spotify से छेड़छाड़ करने की कोशिशें शामिल होती हैं।
Spotify पर आर्टिफ़िशियल स्ट्रीमिंग एक्टिविटी का पता लगाकर उसे कम करने और हटाने में हमने अहम इंजीनियरिंग रिसोर्सेज़ और रिसर्च झोक दी है ताकि आर्टिस्टों को अपनी कला से पैसा कमाने का मौका देने के हमारे मिशन में कोई बाधा न आए और राइट्स के सही हक़दार लोगों को अपने काम के बदले उचित पैसे मिल सकें। ये फ़ीचर हमारे लिए काफ़ी मायने रखता है क्योंकि सिर्फ़ एक नाजायज़ स्ट्रीम की वजह से ईमानदार और मेहनती आर्टिस्ट भी प्रभावित होते हैं।
इस बारे में और जानने के लिए Spotify के इस आर्टिकल को पढ़ें:
आर्टिफ़िशियल स्ट्रीमिंग से Spotify आपको कैसे बचाता है?
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