स्ट्रीमिंग रेट्स में इतना फ़र्क क्यों होता है?
स्ट्रीमिंग रेट्स में फ़र्क इसलिए होता है कि आपकी बकाया अमाउंट का हिसाब लगाने के लिए सर्विसेस कई फ़ैक्टर्स का इस्तेमाल करती हैं, और इन रेट्स को जोड़ने का तरीका सर्विस दर सर्विस अलग होता है। रेट्स का हिसाब लगाने के लिए सर्विसेज़ द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले कई पैमानों में से कुछ हैं:
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स्ट्रीम्स/डाउनलोड्स का नंबर
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इलाका
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सब्सक्रिप्शन टाइप (फ़्री vs. पेड सब्सक्रिप्शन)
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ऐड/सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू
प्रो राटा मॉडल
ज़्यादातर सर्विसेस कमाई को प्रो राटा मॉडल के तहत डिस्ट्रीब्यूट करती हैं। इस मॉडल के तहत किसी प्रोडक्ट टियर से होने वाले समूचे रेवेन्यू को एक-साथ पूल करके उस रेवेन्यू का एक तय हिस्सा आर्टिस्टों के लिए अलग रख दिया जाता है। बचे हुए रेवेन्यू को फिर गानों को उस प्रोडक्ट टियर के लिए होने वाली कुल स्ट्रीम्स में उनके हिस्से के आधार पर दिया जाता है।
उदाहरण:
एक महीने में कुल 1 करोड़ स्ट्रीम्स हासिल करने वाले पेड सब्सक्रिप्शन टियर में डिस्ट्रीब्यूट करने के लिए किसी सर्विस के पास $1,000 हैं। उन 1 करोड़ स्ट्रीम्स में से मान लीजिए आपके गाने को 1,500 बार स्ट्रीम किया गया था।
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1,500/1,00,00,000*$1,000= $0.15 बकाया
ध्यान दें कि ऊपर दिया उदाहरण किसी असली सर्विस पर आधारित नहीं है, और प्रो राटा मॉडल अप्लाई करने का हर सर्विस का अपना खुद का एक तरीका होता है। उदाहरण के लिए, Spotify ने एक बढ़िया वीडियो तैयार किया है, जिसमें ये समझाया गया है कि उनके प्लेटफ़ॉर्म पर कमाई को कैसे जोड़ा जाता है: Spotify आपकी पेमेंट का हिसाब कैसे लगाता है?
सेल्स vs. स्ट्रीम्स
स्ट्रीमिंग की जगह डिजिटल डाउनलोड्स की सेल करने वाली सर्विसेज़ आमतौर पर उस सेल की एक परसेंटेज लेती हैं, जो अक्सर 30% तक होती है, जबकि बाकी की 70% अमाउंट उस आर्टिस्ट की जेब में जाती है। लेकिन ये परसेंटेज सर्विस दर सर्विस अलग होती है।
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